अयोध्या में गूंजा वैदिक स्वर, सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ के चौथे दिवस पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने लिया सदगुरु का आशीर्वाद
अयोध्या धाम की पावन धरती इन दिनों वैदिक मंत्रों, शंखनाद और भक्तिभाव से सराबोर है। भव्य रूप से आयोजित सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ के चौथे दिवस आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर दिखाई दी। इस अवसर पर चिल्लुपार के पूर्व विधायक श्री विनय शंकर तिवारी विशेष रूप से यज्ञ स्थल पहुंचे और पूज्य सदगुरु जी महाराज के श्रीचरणों में प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
यज्ञ मंडप में प्रवेश करते ही उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की और राष्ट्र कल्याण, सामाजिक समृद्धि एवं विश्व शांति की कामना के साथ आहुति अर्पित की। इसके पश्चात सदगुरु जी महाराज से भेंट कर उन्होंने आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की और धर्म-संस्कृति के संरक्षण पर विचार साझा किए।
अपने संबोधन में श्री तिवारी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करते हुए कहा, “राम केवल एक आदर्श राजा ही नहीं थे, बल्कि वे धर्म और यज्ञ की मर्यादा के संरक्षक भी थे। जब भी धर्म की स्थापना का समय आया, राम ने स्वयं आगे बढ़कर उसकी रक्षा की। आज हमें भी उनके आदर्शों को आत्मसात कर धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि अश्वमेघ महायज्ञ जैसे दिव्य आयोजन केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और सनातन मूल्यों को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम हैं। अयोध्या की इस पुण्यभूमि पर ऐसा विराट आयोजन पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
सदगुरु जी महाराज ने पूर्व विधायक को आशीर्वाद देते हुए समाजसेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी। यज्ञ स्थल पर उपस्थित संत-महात्माओं, विद्वान आचार्यों और श्रद्धालुओं ने उनके आगमन का स्वागत किया और इसे धर्म के प्रति उनकी आस्था का प्रतीक बताया।
चौथे दिन यज्ञ परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वैदिक ऋचाओं की अनुगूंज, भजन-कीर्तन और शंखध्वनि के बीच भक्तों ने आहुति अर्पित कर अपने जीवन में सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ निरंतर आध्यात्मिक ऊंचाइयों को स्पर्श करते हुए अयोध्या धाम को धर्ममय आभा से आलोकित कर रहा है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था व प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।



