लार–परासी चकलाल मार्ग पर लोगों का सवाल कब बनेगा मार्ग जिम्मेदारों की चुप्पी पर प्रश्नचिह्न
देवरिया। विकास क्षेत्र लार – प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लार–परासी चकलाल मार्ग रोपन छपरा में निर्माण कार्य इन दिनों गंभीर आरोपों और अव्यवस्था को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं।मार्ग पर निर्माण कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है, स्थानीय लोग नाराज़ हैं, धूल और गड्ढों से परेशान हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग और ठेकेदारों की उदासीनता ने जनता का धैर्य जवाब दे दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़कें जीवनरेखा होती हैं, लेकिन यहां लोगों को केवल इंतज़ार, वादे और धोखे ही मिले हैं।
मार्ग का कार्य : जून 2023 से शुरू, दो वर्षों बाद भी अधूरा
लार से रोपन छपरा होते हुए परासी चकलाल तक मार्ग का निर्माण जून 2023 में शुरू किया गया था। लेकिन आज तक सड़क अधूरी पड़ी है।
ग्रामीणों के अनुसार—कई बार मशीनें आईं और कुछ दिन काम कर चली गईं
निर्माण सामग्री बार-बार गिराई गई, लेकिन काम पूरी तरह शुरू नहीं हुआ
जो हिस्सा बना भी है, वह अधूरा और धूल-मिट्टी से भर गया हैl
धूल में लिपटकर गुजर रहे राहगीर
रोड की खराब स्थिति इतनी बदतर है कि बाइक, साइकिल, ई-रिक्शा, पैदल चलने वाले और स्कूल-कॉलेज के छात्रों तक — धूल के बादलों में गायब हो जाते हैं।
ग्रामीण कहते हैं—
“सड़क से गुजरते ही पूरा शरीर धूल से सफेद हो जाता है।
बच्चों और महिलाओं की सेहत पर असर पड़ रहा है।
फिर भी जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।”
नेतृत्व गायब—जवाबदेही शून्य
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि—
क्या इस क्षेत्र का कोई नेतृत्व है?
जनप्रतिनिधि आखिर कहाँ हैं?
सड़क बनेगी या नहीं — इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
इस मार्ग पर लगभग आधा दर्जन गांव आता है जिसमें चार ग्राम प्रधान आते हैं, जिनमें से एक को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया है, लेकिन फिर भी सड़क निर्माण की स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और विभागीय अधिकारी सड़क निर्माण पर गंभीर नहीं दिखते।
रोपन छपरा में सड़क निर्माण कार्य में घटिया गिट्टी,सिमेंट ग्रामीणों ने रुकवाया काम
रोपन छपरा मे निर्माण कार्य विवादों में घिर गया। ग्रामीणों का आरोप था कि सड़क पर बेहद घटिया गुणवत्ता की गिट्टी और सामग्री डाली जा रही थी।
काम शुरू होते ही लोगों ने देखा कि सामग्री मानक के अनुरूप नहीं है, जिसके बाद ग्रामीणों ने मौके पर ही काम बंद करा दिया।
ठेकेदार का वादा — “तीन दिन में नई सामग्री आएगी”, लेकिन हफ्तों से ज्यादा हो गए
काम रुकने के बाद ठेकेदार ने आश्वासन दिया कि—
“तीन दिन में बेहतर मटेरियल भेज दिया जाएगा।”लेकिन अब हफ्तों से ज्यादा समय बीत गया, ना तो नई गिट्टी आई, न कोई काम दोबारा शुरू हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार जानबूझकर देरी कर रहा है और घटिया सामग्री वापस लगाने की तैयारी में है।

इसको लेकर रोपन छपरा के ग्राम प्रधान श्री दीपेन्द्र सिंह ने स्पष्ट और मजबूत लहजे में आरोप लगाया—
“ठेकेदार घटिया सामग्री से सड़क बनाना चाहता है।
मैंने ही ग्रामीणों के साथ मिलकर कार्य रुकवाया है।
पैसों का लालच देकर रुके हुए काम को फिर से शुरू कराने की कोशिश की जा रही है,
लेकिन मैं बिकने वालों में से नहीं हूं।”
उनके इस बयान के बाद ग्रामीणों में उनका समर्थन और ज्यादा बढ़ गया है।
लोगो का सवाल
लार–परासी–चालाल मार्ग की स्थिति देखकर लोग सवाल पूछ रहे हैं—
क्या सरकारी योजनाएँ सिर्फ कागजों पर चल रही हैं?ठेकेदारों पर नियंत्रण क्यों नहीं है?
जवाबदेही तय क्यों नहीं होती?
सड़कें हमारे रोज़ाना जीवन का हिस्सा हैं — फिर इन्हें यूँ ही क्यों लटकाया जा रहा है?
लोगों का कहना है कि यह सिर्फ सड़क का सवाल नहीं है, बल्कि सरकारी पारदर्शिता और जनकल्याण का बड़ा मुद्दा है।
ग्रामीणों की मांगें
लार–परासी–चालाल मार्ग तुरंत काम शुरू हो
धूल नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था हो
केवल मानक सामग्री का उपयोग
ठेकेदार की जांच हो
तकनीकी टीम द्वारा गुणवत्ता परीक्षण
ग्रामीणों की उपस्थिति में काम
वर्तमान स्थिति
मार्ग पर निर्माण लंबे समय से रुका हुआ है।
रोपन छपरा में ठेकेदार का “तीन दिन वाला वादा” हफ्तों से अधूरा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई,
वे बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
निष्कर्ष: लापरवाही और भ्रष्टाचार के बीच फँसी जनता
जहां सड़कें चमचमनी नी चाहिए थीं, वहां धूल, कंकड़, गड्ढे और अधूरापन है।
जहां जवाब मिलना चाहिए था, वहां चुप्पी और टालमटोल है।
प्रधानमंत्री सड़क योजना का उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क सुविधा देना था —
लेकिन देवरिया के इन क्षेत्रों में जनता को सिर्फ अब तक इंतज़ार और धोखा ही मिला है।
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