Thursday, April 30, 2026
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लोहरा में ‘मौत की क्लीनिक’, बिना मानक और डिग्री के हो रहे बच्चेदानी के ऑपरेशन। प्रशासनिक लापरवाही के साए में महिलाओं की जिंदगी से खुला खिलवाड़*

*लोहरा में ‘मौत की क्लीनिक’, बिना मानक और डिग्री के हो रहे बच्चेदानी के ऑपरेशन।
प्रशासनिक लापरवाही के साए में महिलाओं की जिंदगी से खुला खिलवाड़*आजमगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई के दावों के बावजूद जनपद के अतरौलिया क्षेत्र में गैरकानूनी क्लीनिकों का काला कारोबार इन दिनों खुलेआम फल-फूल रहा है। ताजा मामला थाना क्षेत्र के लोहरा ग्राम सभा का है, जहां यूनियन बैंक के समीप संचालित एक कथित क्लीनिक महिलाओं की जिंदगी के लिए ‘मौत का ठिकाना’ बनता जा रहा है।
मीडिया टीम की पड़ताल में सामने आया कि ‘रामलाल’ के नाम से संचालित इस क्लीनिक में बिना किसी वैध पंजीकरण, विशेषज्ञ डॉक्टर और निर्धारित मानकों के महिलाओं की बच्चेदानी जैसे गंभीर ऑपरेशन किए जा रहे हैं। यह न सिर्फ कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीण और गरीब महिलाओं की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची, तो वहां एक महिला का ऑपरेशन हाल ही में किया जा चुका था। क्लीनिक संचालक से बातचीत में चौंकाने वाला सच सामने आया। ऑपरेशन के नाम पर बाकायदा मोलभाव किया जा रहा था। पहले संचालक ने 16 हजार रुपये की मांग की और दवाएं शामिल होने की बात कही। लेकिन जब मरीज ने निजामाबाद में कम खर्च का हवाला दिया, तो वही ऑपरेशन 9 हजार रुपये में करने को तैयार हो गया। यह सौदेबाजी साफ दर्शाती है कि यहां स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि ‘जिंदगी की नीलामी’ चल रही है। पूछताछ में क्लीनिक पर मौजूद व्यक्ति ने दावा किया कि ऑपरेशन के लिए “बाहर से डॉक्टर बुलाए जाते हैं” और पुरुष डॉक्टर ही ऑपरेशन करते हैं। लेकिन मौके पर न तो कोई एमबीबीएस या स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद मिला और न ही कोई जीवन रक्षक उपकरण।
क्लीनिक में न ऑपरेशन थिएटर के मानक पूरे थे, न आपात स्थिति से निपटने की कोई व्यवस्था। न ऑक्सीजन, न मॉनिटरिंग सिस्टम और न ही संक्रमण से बचाव के प्रोटोकॉल।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय से यह अवैध क्लीनिक कैसे संचालित हो रहा था? क्या स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी, या सब कुछ जानकर भी आंखें मूंदे बैठा रहा गया?
बिना पंजीकरण और अनुमति के इतने बड़े ऑपरेशन आखिर किसकी शह पर हो रहे हैं?
ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के अवैध क्लीनिकों का खुलेआम चलना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही की एक और भयावह तस्वीर पेश करता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बिना प्रशिक्षित सर्जन और मानक अस्पताल व्यवस्था के बच्चेदानी का ऑपरेशन बेहद खतरनाक होता है। इससे गंभीर संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव और मरीज की मौके पर मौत तक की आशंका बनी रहती है।
मामले को लेकर जब अतरौलिया के सामु0 स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक हरिश्चंद्र मौर्य से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामले को संज्ञान में लिया गया है और तत्काल जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी, या फिर प्रशासन सच में ‘मौत की इन क्लीनिकों’ पर लगाम कस पाएगा?

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