सीमा अली
देवी मंदिर में नहीं, मां के चरणों में बसती है असली आराधना”
नौ दिन नौ रूप सजाकर देवी पूजा करते हो।
नौ माह जो गर्भ में रखें क्यों ना पूजा करते हो।
अपने हिस्से का तुझे खिलाया उसकी चिंता नहीं तुझे।
भूखे प्यासे रहकर तुम देवी को भोग लगाते हो
तन मन धन न्योछावर करके देवी पूजा करते हो।
यदि मां कुछ मांग रखे तो ठंडी आहें भरते हो।
मां का बस आदर करना देवी मां खुश हो जाएगी
घर मंदिर हो जाएगा जब घर में मां मुस्कायेगी।
यह दुनिया चलने वाली आगे ही चलती जाएगी।
कालचक्र चलता रहता आगे ही बढ़ती जाएगी।
यह ना सोचो मेरे संग सब कुछ ही अच्छा होगा।
जो बाटोगे वही मिलेगा लाखों जुगत लगाओगे।
मेरी मानो ना मानो मां को ही देवी मानो तुम।
उसकी ही पूजा कर लो देवी मां हर्षायेगी।



