नया भूसा पशुओं को कर सकता है बीमार, रखें सावधानी
देवरिया। विकास खंड बैतालपुर के पशुधन प्रसार अधिकारी निशाकांत तिवारी द्वारा संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान ग्राम उसरा बाजार, तिवई, कोईलगड़हा एवं जंगल ईमिलिहां में पशुपालकों को जागरूक किया गया। उन्होंने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद प्राप्त होने वाला नया भूसा पशुओं के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने अवगत कराया कि नए भूसे में फाइबर एवं लिग्निन की मात्रा अधिक होने के कारण इसका पाचन कठिन होता है। बिना सावधानी के इसे खिलाने से पशुओं में गोबर बंद (कब्ज), पेट फूलना, गैस एवं अफरा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही, यह पाचन तंत्र को प्रभावित कर गंभीर स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि फसलों पर छिड़के गए पेस्टिसाइड्स के अवशेष नए भूसे पर बने रहते हैं, जिससे पशुओं में दस्त की समस्या हो सकती है। केवल नया भूसा खिलाने से पशु कमजोर हो सकते हैं तथा उनके दूध उत्पादन में कमी आ सकती है।
नया भूसा खिलाते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। भूसे को खिलाने से पूर्व 2–3 घंटे पानी में भिगोकर नरम कर लेना चाहिए। इसे हरे चारे के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर ही देना चाहिए। पाचन को दुरुस्त रखने के लिए सप्ताह में एक-दो बार थोड़ा मीठा सोडा एवं नमक मिलाना लाभकारी होता है। यदि संभव हो तो नए भूसे को पुराने भूसे के साथ मिलाकर धीरे-धीरे आहार में सम्मिलित किया जाए। पशुओं के उत्तम स्वास्थ्य हेतु आहार में मिनरल मिक्सचर का उपयोग भी आवश्यक है।



