निजी जमीन पर रास्ता दिलाना संभव नहीं, अवैध कब्जे का आरोप जांच में निराधार
देवरिया, 26 फरवरी।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक प्रार्थना पत्र में वार्ड संख्या 31, अबूबकर नगर दक्षिणी, देवरिया सदर निवासी राजू वर्मा द्वारा दिव्यांग बच्ची के भविष्य की सुरक्षा के लिए खरीदी गई भूमि पर आने-जाने के मार्ग में अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसील प्रशासन ने विस्तृत जांच कराई।
जांच के दौरान अभिलेखों के अवलोकन में सामने आया कि संबंधित भूमि वर्ष 1995 में प्रार्थी के पिता द्वारा बैनामा के जरिए खरीदी गई थी। विक्रय विलेख में अंकित सीमाओं में किसी भी प्रकार के रास्ते का उल्लेख नहीं मिला। पिता के निधन के बाद उक्त संपत्ति प्रार्थी और उनके चार भाइयों के नाम दर्ज रही। वर्ष 2025 में चारों भाइयों ने दान विलेख के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी प्रार्थी को हस्तांतरित कर दी, लेकिन उस दस्तावेज में भी किसी मार्ग का जिक्र नहीं पाया गया।
प्रशासनिक जांच में यह तथ्य भी स्पष्ट हुआ कि जिस रास्ते की मांग की जा रही है, वह दूसरे व्यक्ति की निजी जमीन में आता है। दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन सहमति नहीं बन पाई।
तहसील प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी की निजी भूमि पर राजस्व विभाग द्वारा जबरन रास्ता उपलब्ध कराना कानूनी रूप से संभव नहीं है। प्रकरण में आगे की कार्रवाई विधिक प्रावधानों के तहत ही की जाएगी।



