Thursday, April 30, 2026
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*शहीद अमर प्रताप सिंह के तेरहवीं में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन, क्षेत्र के लोगों से अपील*

*शहीद अमर प्रताप सिंह के तेरहवीं में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन, क्षेत्र के लोगों से अपील*आजमगढ़। लद्दाख की गलवान घाटी में ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से वीरगति को प्राप्त हुए आईटीबीपी के इंस्पेक्टर अमर प्रताप सिंह (राहुल सिंह) को रविवार को उनके पैतृक गांव खदेरू पट्टी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। हजारों की संख्या में उमड़े लोगों ने नम आंखों से अपने लाल को अंतिम सलामी दी थी।
अतरौलिया क्षेत्र के कटोही ग्राम सभा अंतर्गत खदेरू पट्टी गांव निवासी अमर प्रताप सिंह वर्ष 2007 में आईटीबीपी की 16वीं बटालियन में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वे गलवान घाटी में इंस्पेक्टर रैंक पर तैनात थे। दो जनवरी को छुट्टी बिताकर वे पुनः अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। गुरुवार को ड्यूटी के दौरान अचानक हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया।
शुक्रवार को शहीद के आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे अखंड प्रताप सिंह (पूर्व जिला उपाध्यक्ष, बसपा) ने शहीद की शहादत को नमन करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में भी शहीद के पिता का जज्बा और देशप्रेम प्रेरणादायक है। उन्होंने 27 जनवरी को होने वाले श्रद्धांजलि समारोह में बिना किसी औपचारिक निमंत्रण के अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार से शहीद के परिवार का विशेष ध्यान रखने की मांग की।
मदियापार निवासी विजय प्रकाश मिश्रा ने बताया कि उनके परिवार का शहीद के परिवार से पीढ़ियों पुराना संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि अमर प्रताप सिंह ने न केवल अपने गांव बल्कि पूरे जिले और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने सरकार से शहीद परिवार को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
शहीद परिवार के निकट संबंधी डॉ. राजेंद्र सिंह ने शहीद के पिता मुन्ना सिंह को अपना बचपन का मित्र और सहपाठी बताया। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि अमर प्रताप का सपना बचपन से ही देश सेवा का था। उन्होंने कहा कि अमर प्रताप अपने नाम की तरह इतिहास में अमर हो गए हैं।
शहीद के पिता राणा प्रताप सिंह उर्फ मुन्ना सिंह ने गमगीन होते हुए भी गर्व के साथ कहा,
“मेरा बेटा कीड़े-मकोड़े की मौत नहीं मरा, वह शेर की तरह देश के लिए शहीद हुआ है।”
उन्होंने सरकार से गांव में शहीद के नाम पर पार्क, विद्यालय, स्मारक गेट और भव्य प्रतिमा स्थापित किए जाने की मांग की। उन्होंने बताया कि शहीद के दो छोटे पुत्र अरिहंत और अथर्व हैं। परिवार की आजीविका का मुख्य आधार अमर प्रताप ही थे, इसलिए बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी सरकार द्वारा लिए जाने की अपील की।
इस अवसर पर युवा नेता हर्षित सिंह समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने 27 जनवरी को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में लोगो को शामिल होने का आह्वान किया। इसी दिन शहीद अमर प्रताप सिंह की तेरहवीं भी संपन्न होगी।

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