*अघोर परंपरा के अग्रणी संवाहक और निष्ठावान सिद्ध संत पूज्य बावन बाबा का शिवलोक गमन*
आजमगढ़। 07 नवंबर 2025 का दिन अघोर श्रद्धालुओं के लिए मार्मिक रहा । एक सिद्ध संत का शरीर त्यागना, कइयों की आंखों में आँसू छोड़ गया । हज़ारों लोगों की आस्था और विश्वास के प्रतीक निष्ठावान सिद्ध संत, पूज्य बावन बाबा, ने अपने 79 साल के नश्वर शरीर का त्याग कर दिया । मूलतः उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के निवासी पूज्य बावन बाबा का जन्म आज़मगढ़ की पावन धरती पर हुआ था। आप बचपन से ही साधू वृत्ति में रहने वाले बालक थे । जैसे-जैसे आपकी उम्र किशोरावस्था की दहलीज़ पर पहुँची, आप का आतंरिक वैराग्य चरम पर जा पहुंचा और आपने अपनी स्थूल काया की जन्मस्थली का त्याग कर दिया । आप अपने भ्रमण के दौरान महान संत परम पूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु बाबा अवधूत भगवान राम जी की शरण में आए और उन्हीं के आदेशानुसार अपने-आपको अघोर परंपरा में स्थापित कर लिया । उम्र और तज़ुर्बे का कारवां जैसे-जैसे बढ़ता गया, आपकी अध्यात्मिक उपलब्धियों में भी इज़ाफ़ा हुआ । अपनी अध्यात्मिक आभा के बल पर आप वाराणसी स्थित महान आध्यात्मिक केंद्र और अघोर परंपरा के सर्वमान्य विश्वविख्यात तीर्थस्थान, ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’, की सिद्ध परंपरा के अग्रणी साधक के रूप में जाने और पहचाने गए । और अंततः आप ….. वर्तमान में सम्पूर्ण संसार में समस्त अघोर परंपरा के सर्वमान्य आराध्य-ईष्ट-मुखिया और ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ के वर्तमान पीठाधीश्वर परम पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम कीनाराम जी के ही होकर रह गए ।
अघोराचार्य महाराजश्री के आदेशा-निर्देशानुसार, आप ने, ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ से जुड़े कई आश्रमों में दशकों अपनी सेवा दिया । आध्यात्मिक व् सामाजिक उत्थान के कार्यों में आप का योगदान अविस्मरणीय है । समाज में आप अघोर परंपरा के सिद्ध साधक और अग्रणी प्रहरी के रुप में सामने लोगों के सामने आए ।
लोगों को आपके दिव्य व्यक्तित्व की सरल-सहज अनुभूति हुई । वाणी में भरपूर मिठास और अपने अति-सौम्य व्यक्तित्व से, बरबस, आप लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते थे…. लेकिन साथ ही, अपने विशाल व्यक्तित्व को छुपा कर रखते थे और आमजन से आमजन की ही तरह मिलते-जुलते थे । आप परम पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम कीनाराम जी के अति प्रिय-पात्र थे और महाराजश्री का नाम लिए बगैर उन्हें सिर्फ़ ‘महादेव’ नाम से ही सम्बोधित किया करते थे । भक्तजनों की उलझनों और जिज्ञासाओं का समाधान इतने सरल भाव से किया करते थे कि लोग आपके पास जाने को उत्सुक रहा करते थे । भक्त-समुदाय के बीच आप ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ की अपरम्पार महिमा और अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम कीनाराम जी के शिवत्व की गाथा बड़े मनोभाव से सुनाते थे । समाजिक व्यवस्थाओं के तहत आप ‘अघोरपीठ कैथी शंकरपुर’, लालगंज, आजमगढ़ के व्यवस्थापक भी रहे । संभवतः भक्त समुदाय से जुड़े रहने का ये एक सरलतम और आम सामाजिक ज़रिया था ।
07 नवंबर 2025 को आपने अपनी स्थूल काया को भले ही छोड़ दिया लेकिन अघोर परंपरा के अग्रणी संवाहक के तौर पर, आप, हमेशा लोगों के दिलों में बने रहेंगे ।
पूज्य बावन बाबा को समाधि, परम पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम कीनाराम जी की देखरेख और दिशा-निर्देशन में, 08 नवंबर 2025 को आज़मगढ़ जिले स्थित ‘अघोरपीठ कैथी शंकरपुर’ आश्रम में दी जाएगी ।



