*सपा के इतिहास में अपराध, जातीय उन्माद और गुंडागर्दी की लंबी फेहरिस्त है– ‘जनता ने देखा है समाजवादी पार्टी का असली चेहरा-‘रमाकांत मिश्रा*
आजमगढ़। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं श्रम प्रकोष्ठ के सदस्य रमाकांत मिश्र ने इटावा की हालिया घटना को लेकर समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सपा के इतिहास में अपराध, जातीय उन्माद और गुंडागर्दी की लंबी फेहरिस्त है, जिसे प्रदेश की जनता भलीभांति जानती है। अपने अतरौलिया स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में रमाकांत मिश्र ने कहा, “इटावा और गोरखपुर की घटनाओं से पहले मैं कन्नौज की उस घटना को याद दिलाना चाहूंगा जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और एक ब्राह्मण युवक का सर कलम कर लखनऊ लाया गया था। यह जघन्य कांड सपा के लोगों द्वारा ही किया गया था।” उन्होंने इटावा में दो-दो आधार कार्ड मिलने, और कथित रूप से धार्मिक वेश में प्रवचन देने की घटना पर भी सपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “बहरूपिया बनकर समाज को गुमराह करने की यह कोशिश सपा की घिनौनी साजिश का हिस्सा है। समाज को जातियों में बांटने की जो साजिश सपा रच रही है, वह कभी सफल नहीं होगी। भाजपा का हर कार्यकर्ता इसके खिलाफ संघर्ष करेगा।” 
गोरखपुर की घटना पर विपक्ष के सवालों पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “नेता प्रतिपक्ष को वहां के व्यापारियों ने स्वयं अस्वीकार कर दिया। प्रशासन ने कानून के दायरे में रहकर शांति व्यवस्था बनाए रखी। लेकिन सपा के शासनकाल में यही स्थिति होती तो कोई भी अपराधी बच नहीं पाता, क्योंकि उस वक्त थाने और तहसील सपा कार्यालय से संचालित होते थे।” मिश्र ने आरोप लगाया कि सपा के राज में भूमाफिया, गुंडे व बाहुबलियों का बोलबाला था। “उस दौर में बहन-बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी, और जनता डर के साये में जी रही थी। भाजपा सरकार ने इन हालातों को बदला है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है।”
पूर्व सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचारों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि “सपा सरकार में आयुर्वेद विभाग में 175 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था, जिससे कई लोगों की मौत तक हुई। उस समय के स्वास्थ्य मंत्री और विधान परिषद सदस्य भी इस मामले में संलिप्त थे। यह आज भी एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।” अंत में रमाकांत मिश्र ने सपा नेताओं पर नैतिकता की दुहाई देने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “जो लोग भाजपा पर आरोप लगाते हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। जिन जनप्रतिनिधियों ने एक दौर में सपा के खिलाफ आवाज उठाई, आज वे ही घुटनों के बल जाकर उसी पार्टी की दासता स्वीकार कर रहे हैं।”



