*पूर्वान्चल और आज़मगढ़ की मिट्टी से उपजे युवाओं में इनोवेशन और स्टार्टअप की असीम संभावनाएं ,स्टार्टअप्स और इन्नोवेशन के माध्यम से ही आत्मनिर्भर भारत का निर्माण सम्भव-डॉ0 ओंकार राय*
आज़मगढ़। श्री गांधी पी जी कॉलेज मालटारी के लाइब्रेरी हाल में,इनोवेशन और स्टार्टअप पर एक सफ़ल सेमीनार का आयोजन सम्पन्न हुआ जिसमें जिले के इन्नोवेटिव स्टार्टअप्स से जिले की पहचान बनाने वाले उद्यमियों,मूर्तिकार शैलेन्द्र सिंह सिद्धार्थ,ब्लैक पॉटरी उद्यमी बैजनाथ प्रजापति,मुबारक़पुर साड़ी उद्यमी शाजेब रियाज़,उदित सिंह हॉर्टिकल्चर आदि का सम्मान आइडिया एंड स्टार्टअप पूर्व के चेयरमैन डॉ0 ओंकार राय के हाथों से , साज़ फाउंडेशन के श्रीमती संतोष सिंह द्वारा निर्मित चरखा स्मृति चिन्ह के द्वारा हुआ।
स्टार्टअप्स और इन्नोवेशन के माध्यम से उद्योगों और उद्यमियों को राष्ट्र विकास की मुख्य धारा से जोड़ने,रोज़गार की संभावनावों को विस्तार देने के लिए विभिन्न आयोगों और संस्थाओं के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य रहे राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात स्टार्टअप विचारक डॉ0 ओंकार राय ने अपने उद्बोधन में कहा कि, वक्त के साथ खुद को बदलना प्रकृति का अनिवार्य नियम है, बाज़ार की मांग के अनुसार नूतन अभिनव प्रयोगों के साथ अपनी कला कौशल के प्रयोग से न केवल हम अपनी आर्थिकी को मजबूत बना सकते है बल्कि ऐसे ही छोटे छोटे प्रयासों से हम लाभ और रोजगार को विस्तार देकर राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी गतिमान और सशक्त बना सकते हैं, आज़मगढ़ मऊ काशी लगायत पूरे पूर्वान्चल में अपने कला कौशल और अभिनव प्रयोगों से ज़िंदा स्टार्टअप्स उद्योगों के माध्यम से विकास की असीम संभावनाएं मौज़ूद हैं, जो मेरे और मेरी संस्था से जुड़कर खुद के साथ राष्ट्र विकास में महती भूमिका निभा सकते हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ0 राय ने आये हुए उद्यमियों और अन्य के प्रश्नों का विस्तार से उत्तर भी दिया।
सेमीनार के आयोजक प्रो0 प्रशान्त कुमार राय ने भारतीय मनीषा के सन्दर्भों को उदधृत करते हुए सेमिनार के विषय को विस्तार दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में महाविद्यालय उपप्रबंधक श्री कृष्ण कुमार राय रहे।
प्रो0 अखिलेश चंद्र ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।सेमिनार का संचालन डॉ0 दानबहादुर यादव एवं संदीप यादव ने किया।
इस अवसर पर,प्रो0 अरुण सिंह, डॉ0 पंकज सिंह, डॉ0 युगांत उपाध्याय, डॉ0 बिजेन्द्र राय,रत्नेश राय एवं एन सी सी के कैडेट्स उपस्थित रहे।



