Saturday, April 25, 2026
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*शिब्ली कॉलेज में सुहेलदेव विश्वविद्यालय का दीक्षारंभ समारोह और राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न , गुरु ही योग्य शिष्य द्वारा कर्तव्यशील नागरिक का निर्माण कर सकता है- प्रो0 संजीव कुमार*

*शिब्ली कॉलेज में सुहेलदेव विश्वविद्यालय का दीक्षारंभ समारोह और राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न , गुरु ही योग्य शिष्य द्वारा कर्तव्यशील नागरिक का निर्माण कर सकता है– प्रो0 संजीव कुमार*आज़मगढ़। नगर के मध्य स्थित शिब्ली नेशनल कॉलेज के परिसर में रविवार को महाराजा सुहेलदेव विश्विद्यालय, शिब्ली कॉलेज और भारतीय शिक्षण मण्डल, गोरक्ष प्रान्त के सँयुक्त तत्वावधान में सुहेलदेव विश्विद्यालय के साहित्यिक कैलेन्डर में दर्ज़ पहले कार्यक्रम दीक्षारम्भ समारोह के अन्तर्गत *भारतीय ज्ञान परम्परा में गुरु-शिष्य सम्बन्ध एवं शिक्षा का महत्व* विषय पर आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग विश्विद्यालय के कुलपति प्रो0 जयप्रकाश सैनी,जननायक चन्द्रशेखर विश्विद्यालय बलिया के कुलपति प्रो0 संजीत कुमार गुप्ता, नवस्थापित माँ पाटेश्वरी देवी विश्विद्यालय बलरामपुर, गोण्डा के कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह एवं जनपद चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक डॉ0 अरुण कुमार सिंह आईपीएस मौजूद रहे,समारोह की अध्यक्षता महाराजा सुहेलदेव विश्विद्यालय के कुलपति प्रो0 संजीव कुमार ने की।
सुहेलदेव विश्विद्यालय के मीडिया प्रभारी और समारोह के मीडिया समन्वयक डॉ0 प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत मंचासीन अतिथि गणों द्वारा दीप प्रज्वल्लन कर किया गया विश्वविद्यालय की प्राध्यापिकाएं डॉ वैशाली व डॉ प्रियंका ने कुलगीत प्रस्तुत कर माहौल को भावपूर्ण बना दिया। स्वागताध्यक्ष शिब्ली कॉलेज के प्राचार्य प्रो0 अफ़सर अली और आयोजन समिति ने विभिन्न महाविद्यालयों के आमन्त्रित विद्वान शिक्षकों,प्राचार्यगणों और छात्र छात्राओं के करतल ध्वनि के मध्य आये हुए विद्वान अतिथियों को अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह एवं ऑक्सीजन रिलीवर प्लांट भेंटकर उनका अभिनंदन किया।
समारोह के मध्य उत्तर प्रदेश शासन द्वारा “एक जनपद,एक उत्पाद” के तहत चिन्हित आज़मगढ़ के ब्लैक पॉटरी उद्योगकर्मी जो मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों सम्मानित हो चुके हैं उनको सपत्नीक अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह और उपहार प्रदान कर स्वदेशी उद्योग के प्रोत्साहन हेतु सम्मानित किया गया।
अतिथियों के लिए अपने स्वागत भाषण में, डॉ0 दिनेश कुमार सिंह ने प्रो0 रविशंकर सिंह,प्रो0 संजीत कुमार गुप्ता और डॉ0 अरुण कुमार सिंह को जनपद की माटी का लाल कहते हुए इसे जनपद के लिए गौरव का अदभुत क्षण बताया।संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए क्रीड़ा सचिव प्रो0 प्रशान्त राय ने शिक्षा को ही आधुनिक मानव का शास्त्र और शस्त्र बताते हुए कहा कि शिक्षा के उद्देश्यों और महान लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए गुरु-शिष्य सम्बन्धों को प्राचीन भारत के आदर्शों पर पुनः आधारित करने के लिए मैराथन प्रयास करना ही होगा।
इस अवसर पर ले0 डॉ0 पंकज सिंह एवं डॉ0 आनन्द कुमार सिंह द्वारा लिखित बी0ए0 राजनीतिशास्त्र,अन्तिम वर्ष छठें सेमेस्टर की पाठ्यपुस्तक “अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं राजनीति” का भी लोकार्पण अतिथि मण्डल के द्वारा किया गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो0 संजीव कुमार ने कहा कि वैदिक काल की गुरुकुल परम्परा से महात्मा बुद्ध के आत्मदीपो भव के सूत्र से गतिमान और आज़ादी के बाद पण्डित मदन मोहन मालवीय और अल्लामा शिब्ली नोमानी जैसे शैक्षिक चेतना के प्रहरियों से गुजरने वाली शिक्षा अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कलेवर में जीर्णोद्धार के साथ ही राष्ट्र निर्माता शिक्षकों और राष्ट्र के भविष्य युवा पीढ़ी के पारस्परिक सम्बन्धों की प्रगतिशील अवस्था से गुजर रही है। *एक कर्तव्यशील गुरु ही एक कर्तव्यशील छात्र के माध्यम से एक कर्तव्यशील नागरिक का निर्माण कर विकसित और विश्वगुरु भारत की संकल्पना को साकार कर सकता है।
प्रो0 जयप्रकाश सैनी ने मानव कल्याण में शिक्षा के महत्व को उजागर करते हुए प्राचीन भारत की गुरुकुल प्रणाली में निहित आदर्श गुरु-शिष्य संबंधों की पुनर्स्थापना पर बल दिया।
आईपीएस अधिकारी डॉ0 अरुण कुमार सिंह ने कहा कि प्राचीन भारत के ग्रन्थों में गुरु को ईश्वर का दर्जा देने का अर्थ यही था कि उनसे प्राप्त विद्या ही जीवन की मुक्ति मार्ग सुलभ करा सकती है यदि सच्चे अर्थों में शिक्षा प्राप्त कर स्वस्थ समाज और दोषमुक्त भारत का निर्माण करना है तो पुनः गुरु-शिष्य सम्बन्धों को प्राचीन मूल्यों पर आधारित करना होगा तभी शिक्षा का सही महत्व स्थापित हो सकेगा।
बलिया विश्विद्यालय के कुलपति प्रो0 संजीत कुमार ने वर्तमान समाज में व्याप्त सामाजिक बुराईयों के उन्मूलन में शिक्षा के महत्व को उजागर करते हुए गुरु-शिष्य सम्बन्ध को उसका मेरुदण्ड कहा,आज प्रारम्भिक शिक्षा के दौर में ही व्यस्ततम जीवनशैली के बीच अभिभावकों की संतान-कर्तव्यों के प्रति उदासीनता,मूल्यों का पतन और शिक्षण संस्थाओं का मूल्यीकरण के बजाय मशीनीकरण ऐसे आदर्श लक्ष्य की प्राप्ति में बाधक है जिसका समाधान आवश्यक हो चुका है।
समारोह के अन्त में प्राचार्य प्रो. अफ़सर अली ने आये हुए सभी आगंतुकों और सारस्वत अतिथियों तथा आयोजक मण्डल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समारोह के समापन की घोषणा की।
समारोह का संचालन समारोह के समन्वयक प्रो. मो. खालिद एवं संगोष्ठी संयोजक ले. डॉ. पंकज सिंह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस अवसर पर आयोजन सचिव के रूप में कुलसचिव डॉ0 अंजनी कुमार मिश्र, स. कुलसचिव डॉ0 महेश श्रीवास्तव,महाविद्यालयों के प्राचार्यगण,आयोजन समिति से प्रो0 जावेद अख़्तर, प्रो0 रेयाज मोहसिन, डॉ0 आसिम खान,डॉ0 बदीउज्ज्मा,डॉ0 सिद्धार्थ,मोहम्मद इब्राहिम, हयात अहमद,आशुतोष माहेश्वरी,सेराज अहमद खान, नबी हसन,मोहम्मद सलमान,डॉ0 जे0पी0 यादव,विश्विद्यालय के अतिथि प्रवक्ता नितेश सिंह, तथा एन सी सी के कैडेट्स भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। कुलपति के निजी सहायक विपिन शर्मा की गरिमामय में उपस्थिति रही,

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